PM Kisan Tractor Yojana : अगर आपने व्हाट्सएप, फेसबुक या किसी वेबसाइट पर पढ़ा है कि केंद्र सरकार “पीएम किसान ट्रैक्टर योजना” चला रही है, जिसमें ट्रैक्टर खरीदने पर 20% से 50% तक सब्सिडी और लाखों रुपये मिलते हैं — तो आवेदन करने से पहले एक मिनट रुकिए। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने साफ बताया है कि इस नाम की कोई केंद्रीय योजना है ही नहीं, और इसे प्रचारित करने वाली वेबसाइटें फर्जी हैं।
इस लेख में आपको तीन चीज़ें साफ-साफ मिलेंगी — (1) PIB ने असल में क्या कहा, (2) ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देने वाली असली सरकारी योजना कौन-सी है और उसमें आधिकारिक रूप से कितनी सब्सिडी तय है, और (3) फर्जी “योजना” वेबसाइट को कुछ ही सेकंड में कैसे पहचानें ताकि आपकी मेहनत की कमाई किसी ठग के पास न चली जाए।
⚠️ सावधान: “PM Kisan Tractor Yojana” के नाम पर चलने वाली कोई भी वेबसाइट अगर आपसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या “फॉर्म चार्ज” माँगे, तो वह ठगी है। किसी भी असली सरकारी सब्सिडी योजना में आवेदन करने के लिए ऑनलाइन फीस नहीं ली जाती। अपना आधार नंबर, बैंक डिटेल या OTP ऐसी किसी साइट पर बिल्कुल न डालें।

लेख की रूपरेखा — 20 विषय
- PIB फैक्ट चेक: “PM Kisan Tractor Yojana” नाम की कोई योजना नहीं है
- तो ट्रैक्टर पर सब्सिडी मिलती कैसे है? असली योजना है SMAM
- ट्रैक्टर सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें — असली प्रक्रिया
- फर्जी सरकारी योजना वेबसाइट कैसे पहचानें
- किसानों के लिए जो केंद्रीय योजनाएँ सच में चल रही हैं
- अफवाह बनाम हकीकत — एक नज़र में
- निष्कर्ष
- जरूरी लिंक
- FAQ
PIB फैक्ट चेक: “PM Kisan Tractor Yojana” नाम की कोई योजना नहीं है
सोशल मीडिया पर लंबे समय से एक मैसेज घूम रहा है जिसमें दावा किया जाता है कि कृषि मंत्रालय “प्रधानमंत्री किसान ट्रैक्टर योजना” के तहत ट्रैक्टर पर सब्सिडी दे रहा है। PIB की फैक्ट चेक यूनिट ने इस दावे की जाँच की और नतीजा यह निकला:
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय इस नाम से कोई योजना नहीं चला रहा।
- मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर योजनाओं की सूची में ऐसी कोई योजना दर्ज नहीं है।
- इस “योजना” के नाम पर बनी वेबसाइटें फर्जी हैं और उनका मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है — PIB ने इन्हें भरोसे के लायक न मानने की सलाह दी है।
इसलिए अगर कोई साइट आपसे “PM Kisan Tractor Yojana फॉर्म” भरवाकर आधार, जमीन के कागज़ और बैंक डिटेल माँग रही है, तो वह डेटा चोरी या फिशिंग का प्रयास हो सकता है। किसी भी सरकारी दावे की जाँच आप खुद PIB फैक्ट चेक पर कर सकते हैं।
तो ट्रैक्टर पर सब्सिडी मिलती कैसे है? असली योजना है SMAM
अच्छी खबर यह है कि ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी सच में मिलती है — बस उसका नाम “पीएम किसान ट्रैक्टर योजना” नहीं है। असली योजना का नाम है कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (Sub-Mission on Agricultural Mechanization – SMAM), जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत चलती है और जिसे राज्य सरकारें अपने कृषि विभाग के जरिए लागू करती हैं।
SMAM का मकसद क्या है
- छोटे और सीमांत किसानों तक खेती की मशीनें पहुँचाना, जहाँ ट्रैक्टर खरीदना अकेले किसान के बस की बात नहीं होती।
- कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) बनाना — यानी किराये पर मशीन देने वाले केंद्र, ताकि जिस किसान के पास ट्रैक्टर खरीदने का पैसा नहीं है वह किराये पर लेकर काम चला सके।
- जिन इलाकों में खेती में मशीनों का इस्तेमाल कम है, वहाँ मशीनीकरण बढ़ाना।
ट्रैक्टर पर कितनी सब्सिडी तय है (आधिकारिक स्लैब)
SMAM की आधिकारिक ऑपरेशनल गाइडलाइंस (agrimachinery.nic.in पर प्रकाशित, अनुबंध-I) में ट्रैक्टर के लिए सब्सिडी इस तरह तय की गई है। ध्यान दें कि यह अधिकतम सीमा है — असल में कितना मिलेगा यह आपके राज्य की उस साल की योजना और बजट पर निर्भर करता है।
| ट्रैक्टर का प्रकार | SC/ST, छोटे व सीमांत, महिला किसान एवं पूर्वोत्तर राज्य | अन्य किसान |
|---|---|---|
| 2WD (08–20 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹2.00 लाख | 40% — अधिकतम ₹1.60 लाख |
| 4WD (08–20 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹2.45 लाख | 40% — अधिकतम ₹1.96 लाख |
| 2WD (20 से 40 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹3.00 लाख | 40% — अधिकतम ₹2.40 लाख |
| 4WD (20 से 40 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹3.60 लाख | 40% — अधिकतम ₹2.88 लाख |
| 2WD (40 से 50 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹4.50 लाख | 40% — अधिकतम ₹3.60 लाख |
| 4WD (40 से 50 PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹5.45 लाख | 40% — अधिकतम ₹4.36 लाख |
| 2WD (50 से अधिक PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹6.00 लाख | 40% — अधिकतम ₹4.80 लाख |
| 4WD (50 से अधिक PTO HP) | 50% — अधिकतम ₹6.50 लाख | 40% — अधिकतम ₹5.20 लाख |
यानी 45 HP का ट्रैक्टर खरीदने वाले एक छोटे किसान के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा ₹4.50 लाख (2WD) तक हो सकती है — लेकिन यह “गारंटी” नहीं है। ज़्यादातर राज्यों में हर साल सीमित संख्या में ही आवेदन स्वीकार होते हैं और चयन लॉटरी या वरीयता क्रम से होता है।
सब्सिडी सीधे हाथ में नहीं मिलती — DBT का मतलब समझिए
यह वह हिस्सा है जिसे फर्जी वेबसाइटें कभी नहीं बतातीं। कृषि यंत्रीकरण की सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए दी जाती है। इसका सीधा मतलब है: पहले आपको स्वीकृति (permit/approval) मिलती है, फिर आप अधिकृत डीलर से मशीन खरीदते हैं और पूरा पैसा खुद चुकाते हैं, उसके बाद बिल और भौतिक सत्यापन के आधार पर सब्सिडी की रकम आपके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में आती है।
इसलिए “सिर्फ ₹500 भरो और ट्रैक्टर घर आ जाएगा” जैसा कोई भी दावा तकनीकी रूप से भी झूठ है।
ट्रैक्टर सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें — असली प्रक्रिया
चरण 1: DBT कृषि यंत्रीकरण पोर्टल पर किसान पंजीकरण
केंद्र सरकार का आधिकारिक पोर्टल agrimachinery.nic.in है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग चलाता है। यहाँ “Direct Benefit Transfer in Agriculture Mechanization” के तहत किसान, निर्माता, उद्यमी और FPO/SHG अपना पंजीकरण करते हैं। इसी पोर्टल से जुड़ा FARMS मोबाइल ऐप भी है, जिससे आप अपने आसपास किराये पर उपलब्ध कृषि यंत्र खोज सकते हैं।
चरण 2: अपने राज्य के कृषि विभाग का पोर्टल देखें
यह सबसे ज़रूरी बात है। SMAM केंद्र की योजना है, लेकिन आवेदन राज्य लेता है। हर राज्य का अपना पोर्टल और अपनी आवेदन विंडो होती है — उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश का e-Krishi Yantra Anudan, राजस्थान का Raj Kisan Saathi, उत्तर प्रदेश का कृषि विभाग पोर्टल, बिहार का OFMAS। इसलिए एक ही “केंद्रीय फॉर्म” खोजने की बजाय गूगल पर “[अपने राज्य का नाम] कृषि यंत्र अनुदान” खोजें और सिर्फ .gov.in या .nic.in वाली साइट खोलें।
चरण 3: जरूरी दस्तावेज़ तैयार रखें
- आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक, क्योंकि OTP उसी पर आएगा)
- भूमि के दस्तावेज़ — खतौनी / जमाबंदी / B-1
- बैंक पासबुक की कॉपी (खाता आधार से लिंक होना चाहिए, क्योंकि पैसा DBT से आएगा)
- जाति प्रमाण पत्र — केवल तब जब आप SC/ST वर्ग की ऊँची सब्सिडी दर का दावा कर रहे हों
- पासपोर्ट साइज फोटो और चालू मोबाइल नंबर
कई राज्यों में आवेदन के साथ एक वापस होने वाली धरोहर राशि (refundable DD/security) जमा करनी पड़ती है, जो चयन न होने पर लौटा दी जाती है। यह किसी निजी वेबसाइट को नहीं, बल्कि राज्य के विभाग को ऑफिशियल चैनल से जमा होती है — इस फर्क को हमेशा ध्यान में रखें।
फर्जी सरकारी योजना वेबसाइट कैसे पहचानें
- डोमेन देखें। असली सरकारी साइट का पता .gov.in या .nic.in पर खत्म होता है। pmkisantractoryojana.in, sarkari-yojana.com जैसी साइटें सरकारी नहीं हैं, चाहे उन पर अशोक स्तंभ का चिह्न लगा हो।
- फीस माँगे तो रुक जाइए। केंद्र या राज्य की कोई भी सब्सिडी योजना ऑनलाइन आवेदन के लिए “रजिस्ट्रेशन फीस” नहीं लेती।
- “आखिरी तारीख आज है” वाला दबाव। जल्दबाजी करवाना ठगी की सबसे आम तरकीब है।
- व्हाट्सएप पर आया लिंक। योजना का नाम खुद कृषि मंत्रालय की वेबसाइट पर खोजकर पुष्टि करें, फॉरवर्ड किए गए लिंक पर क्लिक करके नहीं।
- OTP कभी शेयर न करें। कोई सरकारी अधिकारी फोन पर OTP नहीं माँगता। ठगी हो जाए तो cybercrime.gov.in पर या 1930 पर शिकायत करें।
किसानों के लिए जो केंद्रीय योजनाएँ सच में चल रही हैं
- PM-KISAN (प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि) — भूमिधारी किसान परिवारों को हर साल ₹6,000 की आय सहायता, तीन बराबर किस्तों (₹2,000 प्रति किस्त) में सीधे बैंक खाते में। यह 100% केंद्रीय वित्त पोषित योजना है और 1 दिसंबर 2018 से लागू है। PM Kisan की किस्त और स्टेटस चेक करने की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
- SMAM / कृषि यंत्रीकरण — ऊपर बताई गई ट्रैक्टर और कृषि यंत्र सब्सिडी।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना — फसल नुकसान पर बीमा कवर।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) — रियायती दर पर खेती के लिए कर्ज।
- छोटे कारोबार के लिए PM Mudra Loan Yojana और खेती से जुड़ी कमाई के तरीके यहाँ पढ़ें।
अफवाह बनाम हकीकत — एक नज़र में
| वायरल दावा | असल में क्या है |
|---|---|
| “पीएम किसान ट्रैक्टर योजना” एक केंद्रीय योजना है | इस नाम की कोई योजना नहीं है — PIB फैक्ट चेक |
| एक केंद्रीय पोर्टल पर फॉर्म भरना है | आवेदन राज्य के कृषि विभाग के पोर्टल पर होता है |
| सब्सिडी का पैसा पहले मिल जाता है | पहले खुद खरीदना पड़ता है, बाद में DBT से रीइम्बर्स होता है |
| आवेदन के लिए फीस देनी होती है | सरकारी आवेदन नि:शुल्क होता है; फीस माँगना = ठगी |
| हर किसान को ट्रैक्टर मिलेगा | राज्य में सीमित लक्ष्य, चयन लॉटरी/वरीयता से |
निष्कर्ष
“PM Kisan Tractor Yojana” एक ऐसी योजना है जो सिर्फ अफवाह और फर्जी वेबसाइटों में मौजूद है — सरकारी दस्तावेज़ों में नहीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ट्रैक्टर पर सब्सिडी नहीं मिलती। मिलती है, SMAM के तहत, और उसकी दरें तक सरकार ने सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की हुई हैं। बस रास्ता वह नहीं है जो वायरल मैसेज बताता है। अपने राज्य के कृषि विभाग के पोर्टल पर जाइए, आवेदन विंडो खुलने का इंतज़ार कीजिए, और किसी भी ऐसी वेबसाइट से दूर रहिए जो आपसे पहले पैसे माँगे।
जरूरी लिंक
| DBT कृषि यंत्रीकरण पोर्टल | agrimachinery.nic.in |
| कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय | agriwelfare.gov.in |
| PIB फैक्ट चेक | pib.gov.in/factcheck |
| PM-KISAN | pmkisan.gov.in |
| साइबर ठगी की शिकायत | cybercrime.gov.in / हेल्पलाइन 1930 |
FAQ
क्या PM Kisan Tractor Yojana असली है?
नहीं। PIB फैक्ट चेक के अनुसार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय इस नाम से कोई योजना नहीं चला रहा, और इसे प्रचारित करने वाली वेबसाइटें फर्जी हैं।
फिर ट्रैक्टर पर सब्सिडी किस योजना से मिलती है?
कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) से, जिसे राज्य सरकारें अपने कृषि विभाग के जरिए लागू करती हैं। आधिकारिक गाइडलाइंस में SC/ST, छोटे व सीमांत तथा महिला किसानों के लिए 50% और अन्य किसानों के लिए 40% की दर तय है, ट्रैक्टर की HP श्रेणी के अनुसार अधिकतम सीमा के साथ।
आवेदन कहाँ करना है?
अपने राज्य के कृषि विभाग के कृषि-यंत्र अनुदान पोर्टल पर, और केंद्र के DBT पोर्टल agrimachinery.nic.in पर पंजीकरण करके। किसी निजी “योजना” वेबसाइट पर नहीं।
क्या आवेदन के लिए कोई फीस लगती है?
सरकारी ऑनलाइन आवेदन नि:शुल्क होता है। कुछ राज्यों में वापस होने वाली धरोहर राशि माँगी जा सकती है, जो सरकारी चैनल से जमा होती है। कोई निजी वेबसाइट फीस माँगे तो वह ठगी है।
अगर मैं पहले ही ऐसी साइट पर डिटेल दे चुका हूँ तो क्या करूँ?
तुरंत अपने बैंक को सूचित करें, UPI/नेट बैंकिंग पिन बदलें और cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें। पैसा कटा हो तो पहले 24 घंटे में शिकायत करने पर वापसी की संभावना सबसे ज्यादा होती है।






