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PhonePe से पर्सनल लोन कैसे ले : PhonePe खुद लोन नहीं देता

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PhonePe से पर्सनल लोन कैसे ले — इस सवाल का सही जवाब देने से पहले एक बात साफ़ कर लेनी ज़रूरी है, क्योंकि इंटरनेट पर ज़्यादातर लेख यह छिपा जाते हैं: PhonePe खुद लोन नहीं देता. PhonePe की अपनी लेंडिंग वेबसाइट पर ही लिखा है — “PhonePe does not issue any loans directly. Loans are offered by our lending partners.” यानी लोन देने वाला हमेशा कोई पार्टनर बैंक या NBFC होता है, PhonePe सिर्फ़ उसे आप तक पहुँचाने का प्लेटफॉर्म है.

यह फ़र्क़ सिर्फ़ शब्दों का नहीं है. आपका लोन एग्रीमेंट, ब्याज दर, फीस, EMI और वसूली — सब उसी लेंडर की ज़िम्मेदारी होती है, और शिकायत भी उसी के पास और उसके बाद RBI के पास जाती है. आगे वही बातें हैं जो आवेदन से पहले काम आती हैं — PhonePe पर असल में कौन-से लोन मिलते हैं, e-Sign से पहले कौन-सा कागज़ पढ़ना अनिवार्य है, RBI के नियम आपको क्या अधिकार देते हैं, और नक़ली “PhonePe loan” ऐप्स की पहचान क्या है.

PhonePe से पर्सनल लोन लेने की 6 स्टेप प्रक्रिया दिखाने वाला इन्फोग्राफिक — KYC से लोन राशि खाते में आने तक

इस लेख में आप जानेंगे

लेख की रूपरेखा — 21 विषय

PhonePe लोन देता नहीं, दिखाता है — LSP मॉडल क्या है

RBI की भाषा में PhonePe जैसे ऐप Lending Service Provider (LSP) हैं. RBI की Reserve Bank of India (Digital Lending) Directions, 2025 (8 मई 2025) में LSP को इस तरह परिभाषित किया गया है — किसी विनियमित संस्था (Regulated Entity यानी बैंक/NBFC) का ऐसा एजेंट जो उसके डिजिटल लेंडिंग के एक या एक से अधिक काम करता है, जैसे ग्राहक जुटाना, अंडरराइटिंग में सहायता, सर्विसिंग और वसूली.

इसका सीधा मतलब आपके लिए यह है:

  • लोन “PhonePe का” नहीं, उस बैंक/NBFC का होता है जिसका नाम आपके लोन एग्रीमेंट और Key Fact Statement पर लिखा है. एप्लिकेशन भरने से पहले वह नाम पढ़ लीजिए.
  • ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और लोन की सीमा PhonePe तय नहीं करता — वह लेंडर तय करता है, और अलग-अलग लेंडर के लिए अलग होती है.
  • शिकायत की पहली जगह भी वही लेंडर है. LSP के पास भी शिकायत का रास्ता होना चाहिए, लेकिन ज़िम्मेदारी लेंडर की है.

PhonePe पर असल में कौन-कौन से लोन मिलते हैं

PhonePe की लेंडिंग वेबसाइट पर चार श्रेणियाँ दिखती हैं — Personal Loans, Consumer Lending, Merchant Lending और Secured Lending. ध्यान देने वाली बात यह है कि PhonePe का लेंडिंग प्लेटफॉर्म सुरक्षित (secured) लोन की तरफ ज़्यादा झुका हुआ है, यानी वे लोन जिनमें कोई संपत्ति गिरवी रखी जाती है.

30 मई 2024 की अपनी प्रेस रिलीज़ में PhonePe ने अपने Secured Lending Platform की घोषणा करते हुए ये श्रेणियाँ और पार्टनर बताए थे:

क्या हैजानकारी (PhonePe के अपने स्रोत से)
सुरक्षित लोन की श्रेणियाँम्यूचुअल फंड पर लोन, गोल्ड लोन, बाइक लोन, कार लोन, होम लोन / लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, एजुकेशन लोन
घोषित लेंडिंग पार्टनरTata Capital, L&T Finance, Hero FinCorp, Muthoot Fincorp, DMI Housing Finance, Home First Finance, rupyy, Volt Money, Gradright
मर्चेंट लोन के पार्टनरLenDenClub, Aditya Birla Finance Ltd., PayU Finance India Pvt. Ltd., Muthoot FinCorp Ltd.
लोन देने वाला कौनपार्टनर बैंक/NBFC — PhonePe नहीं
ब्याज दर, फीस, सीमाहर लेंडर अलग तय करता है; आपके लिए लागू आंकड़े सिर्फ़ आपके Key Fact Statement में मिलेंगे
पार्टनर सूची समय-समय पर बदलती रहती है — ताज़ा सूची PhonePe ऐप और उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर देखें.

यानी अगर आप बिना किसी गारंटी वाला बड़ा पर्सनल लोन खोज रहे हैं, तो PhonePe पर वह ऑफर आपको दिखे भी सकता है और नहीं भी — यह आपकी प्रोफाइल और उस समय जुड़े लेंडर पर निर्भर करता है. कोई निश्चित राशि का वादा करने वाला कोई भी लेख या वीडियो ग़लत है. सोना गिरवी रखकर लोन लेने की बात हो तो प्रक्रिया और RBI के LTV नियम गोल्ड लोन वाले लेख में अलग से समझाए गए हैं.

PhonePe से ₹5,000 या ₹10,000 का तुरंत लोन — सच क्या है

लोग सबसे ज़्यादा यही खोजते हैं — “तुरंत”, “इमरजेंसी”, “₹5,000 का लोन”. सच यह है कि छोटी रकम का लोन दिखे या न दिखे, यह आपकी प्रोफ़ाइल और उस समय जुड़े लेंडर पर निर्भर करता है; PhonePe किसी को कोई तय रकम “देता” नहीं. और छोटी रकम के छोटे-अवधि वाले लोन में एक चीज़ छिपी रहती है — प्रोसेसिंग फीस. ₹5,000 के लोन पर ₹300 की फीस मामूली लगती है, पर दो महीने की अवधि में यह असली सालाना लागत (APR) को बहुत ऊपर ले जाती है. इसीलिए तुलना हमेशा APR से कीजिए, “कम ब्याज” के दावे से नहीं.

दूसरी बात, जो किसी ऐप की स्क्रीन पर नहीं लिखी होती: छोटी-छोटी रकम के कई लोन एक साथ लेने पर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में इंक्वायरी और चालू खातों की भीड़ बन जाती है, जिससे बाद में बड़ा लोन (होम/कार) मिलना मुश्किल होता है. अपनी क्रेडिट रिपोर्ट मुफ़्त में देख लेना इसलिए आवेदन से पहले का सबसे सस्ता क़दम है.

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आवेदन से पहले Key Fact Statement (KFS) ज़रूर पढ़ें

यह इस पूरे लेख की सबसे काम की बात है. RBI के 15 अप्रैल 2024 के परिपत्र और Digital Lending Directions, 2025 के तहत लेंडर को आपको एक Key Fact Statement देना अनिवार्य है — सरल भाषा में, एक ही पन्ने पर, लोन की सारी असली शर्तें.

KFS में ये चीज़ें देखिए:

  • लेंडर का नाम — कौन-सा बैंक/NBFC आपको लोन दे रहा है.
  • APR (Annual Percentage Rate) — यह सिर्फ़ ब्याज दर नहीं है. इसमें प्रोसेसिंग फीस और अन्य सारे शुल्क जोड़कर सालाना असली लागत बताई जाती है. दो ऑफर की तुलना हमेशा APR से कीजिए, “ब्याज दर” से नहीं.
  • सारे शुल्क — प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज़ीकरण, बीमा (अगर है), प्री-पेमेंट/फोरक्लोज़र शुल्क, लेट पेमेंट चार्ज.
  • कूलिंग-ऑफ / लुक-अप अवधि — इसी अवधि में आप बिना किसी पेनल्टी के लोन से बाहर निकल सकते हैं (नीचे विस्तार से).
  • वसूली एजेंट की जानकारी — Directions के मुताबिक KFS में यह भी बताना होता है कि कौन-सा LSP वसूली एजेंट के रूप में आपसे संपर्क करने के लिए अधिकृत है. इसके बाहर का कोई फोन आए तो सतर्क हो जाइए.

Directions के अनुसार लोन मंजूर होने पर KFS, लोन प्रोडक्ट का सारांश, सैंक्शन लेटर और नियम-शर्तें — ये सब लेंडर के लेटरहेड पर डिजिटली हस्ताक्षरित होकर आपके वेरीफाइड ई-मेल या SMS पर अपने-आप आने चाहिए. अगर ये कागज़ आपको नहीं मिले, तो यह अपने आप में एक चेतावनी है.

RBI के डिजिटल लेंडिंग नियम आपको कौन-से अधिकार देते हैं

किसी भी ऐप से लोन लेने से पहले ये चार अधिकार याद रखिए. ये Digital Lending Directions, 2025 में लिखे हुए हैं:

  1. पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आएगा. Directions कहती हैं कि लोन का वितरण हमेशा उधारकर्ता के बैंक खाते में ही होगा. अगर कोई कहे कि पैसा किसी वॉलेट या “एजेंट” के खाते में आएगा, वह ग़लत है.
  2. चुकाना भी सीधे लेंडर के खाते में होगा. पुनर्भुगतान बिना किसी pass-through खाते के, सीधे लेंडर के बैंक खाते में जाना चाहिए. किसी व्यक्ति के UPI/नंबर पर EMI भेजने को कभी राजी मत होइए.
  3. कूलिंग-ऑफ अवधि. शुरुआती कूलिंग-ऑफ/लुक-अप अवधि में आप मूलधन और आनुपातिक APR चुकाकर बिना किसी पेनल्टी के लोन से बाहर निकल सकते हैं. यह अवधि हर लेंडर के बोर्ड की नीति से तय होती है, पर एक दिन से कम नहीं हो सकती.
  4. शिकायत का रास्ता RBI तक जाता है. लेंडर के पास शिकायत करने के बाद संतुष्ट न हों, तो RBI की Complaint Management System (cms.rbi.org.in) पर लोकपाल के पास जा सकते हैं. वहाँ 24×7 संपर्क केंद्र का नंबर 14448 भी दिया गया है.

लेंडर RBI के पास रजिस्टर्ड है या नहीं — ऐसे चेक करें

यह जाँच दो मिनट की है और यही सबसे बड़ी सुरक्षा है.

  • ऐप में जो लेंडर का नाम दिख रहा है, उसे RBI की “List of NBFCs and ARCs registered with the RBI” में खोजिए. यह सूची Excel और PDF दोनों में उपलब्ध है.
  • उसी पेज पर एक दूसरी सूची भी है — जिन NBFC का रजिस्ट्रेशन RBI रद्द कर चुका है. नाम वहाँ मिले तो लोन बिल्कुल मत लीजिए.
  • किसी ग़ैर-रजिस्टर्ड संस्था के बारे में शिकायत RBI के सचेत पोर्टल पर की जा सकती है.

PhonePe ऐप में लोन सेक्शन तक कैसे पहुँचें

प्रक्रिया आमतौर पर इस क्रम में चलती है. ध्यान रखिए कि असली स्क्रीन और स्टेप उस लेंडर के हिसाब से बदलते हैं जिसका ऑफर आप चुनते हैं:

  1. PhonePe ऐप केवल Play Store या App Store से इंस्टॉल करें, मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और बैंक अकाउंट लिंक करें.
  2. होम पेज पर नीचे स्क्रॉल करके Loans सेक्शन खोलें और वहाँ उपलब्ध श्रेणी चुनें.
  3. आपको जो ऑफर दिखें, उनमें लेंडर का नाम पढ़िए और ऊपर बताए तरीके से RBI सूची में जाँच लीजिए.
  4. राशि और अवधि (tenure) चुनने पर आगे की पूरी यात्रा लेंडर की होती है — जानकारी भरना, दस्तावेज़ अपलोड, आधार OTP से e-KYC और e-Sign से एग्रीमेंट.
  5. e-Sign करने से ठीक पहले KFS खोलिए और APR तथा सारे शुल्क पढ़िए. यही आख़िरी मौका है. हस्ताक्षर के बाद शर्तें बदलती नहीं.
  6. मंजूरी मिलने पर राशि सीधे आपके बैंक खाते में आती है, और EMI के लिए ऑटो-डेबिट (e-mandate) सेट होता है. ऑटो-डेबिट की तारीख़ से पहले खाते में बैलेंस रखना आपकी ज़िम्मेदारी है, वरना बाउंस चार्ज और क्रेडिट स्कोर दोनों पर असर पड़ता है.

पात्रता और दस्तावेज़ — असली तस्वीर

इंटरनेट पर “21 से 60 साल, 680 CIBIL” जैसे आंकड़े हर जगह कॉपी किए जाते हैं, लेकिन PhonePe इनमें से कुछ भी तय नहीं करता — हर पार्टनर लेंडर अपने मापदंड ख़ुद बनाता है और उन्हें बदलता भी रहता है. इसलिए कोई निश्चित उम्र-सीमा या न्यूनतम क्रेडिट स्कोर यहाँ लिखना ग़लत होगा. आम तौर पर लेंडर ये चीज़ें देखते हैं:

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  • भारतीय नागरिकता और वैध KYC (आधार, पैन)
  • आय का स्थिर स्रोत — नौकरी हो तो सैलरी स्लिप, कारोबार हो तो बैंक स्टेटमेंट
  • 3–6 महीने का बैंक स्टेटमेंट
  • क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्ट (CIBIL/Experian आदि) — इसकी न्यूनतम शर्त हर लेंडर अलग रखता है
  • e-KYC के लिए वह मोबाइल नंबर जो आधार से लिंक हो, और एक सेल्फी

अपना क्रेडिट स्कोर आप हर क्रेडिट ब्यूरो से साल में एक बार मुफ़्त देख सकते हैं. आवेदन से पहले यह देख लेना समझदारी है, क्योंकि बार-बार आवेदन करके रिजेक्ट होना ख़ुद स्कोर को नुक़सान पहुँचाता है. PAN अभी तक नहीं बना है तो घर बैठे PAN कार्ड बनवाने का तरीक़ा पहले देख लीजिए, उसके बिना e-KYC आगे नहीं बढ़ता.

PhonePe से लें, बैंक से लें या किसी लोन ऐप से — फ़र्क़ क्या है

तीनों रास्तों का लेंडर अलग होता है, इसलिए लागत भी अलग बैठती है:

  • PhonePe जैसे प्लेटफ़ॉर्म से — एक ही जगह कई लेंडर के ऑफर दिख जाते हैं, प्रक्रिया पेपरलेस है. पर आप सिर्फ़ वही ऑफर देख पाते हैं जो उस समय आपकी प्रोफ़ाइल पर दिख रहे हैं, और शर्तें लेंडर की होती हैं.
  • सीधे बैंक से — सैलरी अकाउंट वाले बैंक में अक्सर सबसे कम दर और साफ़ शर्तें मिलती हैं, पर प्रक्रिया थोड़ी धीमी और दस्तावेज़ ज़्यादा होते हैं. उदाहरण के लिए SBI से पर्सनल लोन लेने की पूरी प्रक्रिया देखिए, जहाँ फीस और पेनल्टी तक वेबसाइट पर लिखी होती हैं.
  • सीधे लोन ऐप से — मंज़ूरी सबसे तेज़, पर APR आम तौर पर सबसे ऊपर. Navi, KreditBee और MoneyView जैसे ऐप की प्रक्रिया अलग-अलग लेखों में दी गई है.

और अगर पैसा कारोबार के लिए चाहिए, तो पर्सनल लोन आमतौर पर सबसे महँगा रास्ता होता है — PM मुद्रा लोन योजना जैसी स्कीम पहले देख लेनी चाहिए.

नक़ली “PhonePe Loan” ऐप और APK से कैसे बचें

“तुरंत लोन” के नाम पर चलने वाली ठगी में सबसे ज़्यादा नाम जाने-माने ब्रांड्स का ही इस्तेमाल होता है. ये संकेत देखते ही रुक जाइए:

  • WhatsApp या Telegram से भेजी गई APK फाइल. कोई भी असली लेंडर ऐप इस तरह नहीं भेजता. ऐप हमेशा Play Store/App Store से ही लीजिए और डेवलपर का नाम मिलाइए.
  • लोन मिलने से पहले पैसा माँगना — प्रोसेसिंग फीस, “फाइल चार्ज”, GST, इंश्योरेंस या रिफंडेबल डिपॉजिट के नाम पर. असली लोन में शुल्क वितरित राशि से कटता है, अलग से पहले नहीं लिया जाता.
  • कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी और SMS की परमिशन. लोन देने के लिए इनकी ज़रूरत नहीं होती. यही डेटा बाद में ब्लैकमेल और रिश्तेदारों को फोन करने में इस्तेमाल होता है.
  • KFS, सैंक्शन लेटर या लेंडर का नाम न देना. यह अकेला ही ऐप छोड़ देने के लिए काफ़ी कारण है.
  • स्क्रीन शेयर करने या AnyDesk जैसा ऐप इंस्टॉल करने को कहना. इससे आपका फोन उनके नियंत्रण में चला जाता है.

अगर ठगी हो चुकी है तो देर मत कीजिए — 1930 पर कॉल कीजिए और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कीजिए. जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम रुकने की संभावना उतनी ज़्यादा रहती है. ग़ैर-रजिस्टर्ड लोन ऐप की जानकारी सचेत पोर्टल पर भी दीजिए.

शिकायत कहाँ करें — सही क्रम

  1. पहले लेंडर के पास — उसी बैंक/NBFC के ग्राहक शिकायत अधिकारी को, जिसका नाम आपके KFS पर है. साथ ही PhonePe के हेल्प सेक्शन में भी शिकायत दर्ज कीजिए.
  2. फिर RBI लोकपाल — 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले, तो cms.rbi.org.in पर शिकायत दर्ज करें या 14448 पर कॉल करें.
  3. ग़ैर-रजिस्टर्ड संस्था हो तो — sachet.rbi.org.in पर रिपोर्ट करें.
  4. धोखाधड़ी/धमकी हो तो — 1930 और cybercrime.gov.in, और स्थानीय पुलिस में FIR.

लोन लेने से पहले आख़िरी दो मिनट

PhonePe से लोन “लेना” असल में PhonePe के ज़रिये किसी बैंक या NBFC से लोन लेना है. प्रक्रिया तेज़ और पेपरलेस ज़रूर है, लेकिन तेज़ होने का मतलब सस्ता होना नहीं है. जो एक काम आपको बाक़ी सबसे ज़्यादा बचाएगा वह यह है — e-Sign से पहले Key Fact Statement खोलिए, APR और सारे शुल्क पढ़िए, और लेंडर का नाम RBI की सूची में मिला लीजिए. और एक सवाल ख़ुद से पूछिए: अगली छह EMI मेरी मौजूदा आमदनी से निकल जाएँगी या नहीं? जवाब “शायद” हो, तो रकम घटाइए या रुक जाइए.

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ज़रूरी लिंक

PhonePe Lending (आधिकारिक)Link
RBI में रजिस्टर्ड NBFC की सूचीLink
RBI शिकायत पोर्टल (CMS) — 14448Link
साइबर फ्रॉड शिकायत — 1930Link
Home PageLink

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या PhonePe ख़ुद लोन देता है?

नहीं. PhonePe की अपनी लेंडिंग वेबसाइट पर साफ़ लिखा है कि वह सीधे कोई लोन जारी नहीं करता — लोन उसके लेंडिंग पार्टनर देते हैं. RBI की भाषा में PhonePe एक Lending Service Provider (LSP) है, यानी बैंक/NBFC का एजेंट. आपका लोन एग्रीमेंट उसी बैंक या NBFC के साथ बनता है.

PhonePe से कितने रुपये तक का लोन मिल सकता है?

कोई तय राशि नहीं है. लोन की सीमा, ब्याज दर और अवधि वह पार्टनर बैंक/NBFC तय करता है जिसका ऑफर आपको दिखा है, और यह आपकी आय व क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करता है. आपके लिए लागू असली आंकड़े सिर्फ़ आपके Key Fact Statement में लिखे होते हैं.

Key Fact Statement क्या होता है और क्यों ज़रूरी है?

KFS एक अनिवार्य दस्तावेज़ है जिसमें लेंडर का नाम, APR यानी सारे शुल्क जोड़कर सालाना असली लागत, प्रोसेसिंग व अन्य फीस, कूलिंग-ऑफ अवधि और वसूली एजेंट की जानकारी सरल भाषा में दी जाती है. RBI की डिजिटल लेंडिंग डायरेक्शंस के तहत यह आपको लोन एग्रीमेंट से पहले मिलना चाहिए. दो ऑफर की तुलना हमेशा APR से करें.

लोन लेने के बाद क्या उसे रद्द किया जा सकता है?

हाँ, शुरुआती कूलिंग-ऑफ या लुक-अप अवधि में. RBI की डिजिटल लेंडिंग डायरेक्शंस के मुताबिक इस अवधि में आप मूलधन और आनुपातिक APR चुकाकर बिना पेनल्टी लोन से बाहर निकल सकते हैं. यह अवधि हर लेंडर के बोर्ड की नीति से तय होती है लेकिन एक दिन से कम नहीं हो सकती, और आपके KFS में लिखी होती है.

PhonePe में Loans का विकल्प दिख ही नहीं रहा, क्या करें?

यह सामान्य है. ऑफर सबको नहीं दिखते — वे आपकी प्रोफ़ाइल और उस समय जुड़े लेंडर पर निर्भर करते हैं, और कई श्रेणियाँ हर पिन कोड पर उपलब्ध नहीं होतीं. ऐप को बार-बार अनइंस्टॉल करने या किसी “एजेंट” से लिंक लेने का कोई फ़ायदा नहीं; ऐसा कोई लिंक असल में ठगी का रास्ता होता है.

लोन का स्टेटस और बक़ाया कहाँ देखें?

ऐप के Loans सेक्शन में स्टेटस दिखता है, लेकिन असली और अंतिम रिकॉर्ड लेंडर का होता है — उसी के ऐप, वेबसाइट या कस्टमर केयर से स्टेटमेंट लीजिए. पूरा भुगतान करने के बाद लेंडर से No Dues / NOC ज़रूर लीजिए और कुछ हफ़्तों बाद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में खाता “Closed” दिख रहा है या नहीं, यह भी देख लीजिए.

लोन ऐप परेशान कर रहा है या धमकी दे रहा है तो क्या करें?

पहले उसी लेंडर के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत दें. संतोषजनक जवाब न मिले तो cms.rbi.org.in पर RBI लोकपाल के पास जाएँ या 14448 पर कॉल करें. अगर संस्था RBI में रजिस्टर्ड ही नहीं है तो sachet.rbi.org.in पर रिपोर्ट करें. धमकी, ब्लैकमेल या पैसे की ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.

स्रोत: PhonePe की आधिकारिक लेंडिंग वेबसाइट और 30 मई 2024 की प्रेस रिलीज़; RBI (Digital Lending) Directions, 2025 (8 मई 2025); RBI का Key Fact Statement परिपत्र (15 अप्रैल 2024); RBI की NBFC सूची, CMS शिकायत पोर्टल और सचेत पोर्टल; गृह मंत्रालय के I4C का साइबर क्राइम पोर्टल.

वित्तीय अस्वीकरण (Financial Disclaimer)

निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है — इसे किसी भी रूप में वित्तीय सलाह न समझें। हम RBI, SEBI या IRDAI द्वारा पंजीकृत वित्तीय सलाहकार नहीं हैं। लोन की ब्याज दरें, फीस और शर्तें समय-समय पर बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक/NBFC की आधिकारिक वेबसाइट पर ज़रूर जाँच करें। किसी भी निवेश से पहले SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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